surendra.shastram
Thursday, May 6, 2010
दिनचर्या कथं स्यान्नः ?
"
प्रात
र्वैदिक
कर्मत
स्तदनु
सद्वेदांत
संचिन्तया
पश्चाद्भा
रतमोक्ष
धर्म
कथया
वासिष्ठ
रामायणात
/
सायं
भागवतार्थ
तत्त्व
कथया
रात्रौ
निदिध्यासनात
कालो
गच्छतु
नः
शरीर
भरणं
प्रारब्ध
कंठा
र्पितं
//" विद्यारण्यस्वामी
जाग्रत्स्वप्न
सुषुप्ति
षु
तुरीयां
सिंचेत
/
शिव
सूत्रम
/
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