surendra.shastram
Sunday, May 30, 2010
लोकतन्त्रं कथं सुखम !
"
न
वा
उ
देवाः
क्षुद
मिद्व
धं
ददु
:
उताशितमु
पग
च्छ
न्ति
मृत्यवः
/
उतो
रयिं पृ
नतो
नोपदस्यति
उता
पृ
नन
मर्डितारम
न
विन्दते
//"
*
ऋग्वेद
:
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